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Showing posts with the label मैं और तन्हाई

ज़िन्दगी

प्यार में फिर से पड़ने लगी हूँ भरी भरी सी हैं ज़िन्दगी ,   भावो में बहने लगी हूँ हाँ मैं तेरे प्यार में फिर से पड़ने लगी हूँ सोचा रुक जाएगी ज़िन्दगी , जब उसने मेरे दिल को तोडा लेकिन तूने आके मेरी ज़िन्दगी में इसका टुकड़ा टुकड़ा जोड़ा, सपने लेने छोड़ दिया था , लगी थी तनहा सा रहने अब तू मिला ज़िन्दगी में और तेरे सपने के सागर में लगी हूँ बहने भरी भरी सी हैं ज़िन्दगी ,   भावो में बहने लगी हूँ …. चली गयी थी चेहरे की हंसी आने लगे थे दुःख तुम मिला ज़िन्दगी में अब सच हैं सारे सुख प्यार एक शब्दो का खेल हैं , ऐसा लगा था सबसे कहने आज तो फिर से प्यार हो गया और लगी हूँ तेरे ख्वाबो में रहने भरी - भरी सी हैं ज़िन्दगी , भावो में बहने लगी हूँ …  

मोहब्बत

मुझे उनसे बहुत मोहब्बत हो गई, अरे ये क्या कयामत हो गई, रातों की नींदें उड़ गई, दिन का चैन खो गया, मेरे दिल की तारें उनके दिल से जुड़ गई, हर रोज मेरी आंखे उनकी राह देखती है, और मन मे हर रोज एक नई किरण बनती है खुदा भी एक बार महरबानी हो जाए, और कबूल कर ले मेरी ये पुकार तो खुल जायेंगा अपने ये नसीब जब होंगे मेरा gugu मेरे करीब.............

तुझको चाहने लगी

दुनिया से मैं छिप – छिपाते , ना जाने कब तुझको चाहने लगी ! ना चाहते हुए भी चुपके-2 से तेरे पीछे आने लगी !   तुझे देखे बिना ना ही नींद आती और ना ही चैन मिलता है लगता है , ये दीवाना दिल तेरी यादो में खो गया है । मुझे तेरी यादो में रातों को रोने आता है !   सोचती हूँ , क्या है तेरा और मेरा रिश्ता ? जो तुम मुझे बहुत याद आते हो ,   काश ! तुम मेरे होते ,   फिर रोज नए सबेरे होते , लेकिन ये हो ना सका ,  ऐसा क्यों हुआ किस बात की सजा मिली हम दोनों को... कहा जाये,  किसे बताये इस दिल की बाते............

जाने क्या रिश्ता है जाने क्या नाता है तुमसे.........

जाने क्या रिश्ता है जाने क्या नाता है तुमसे अनजाना सा एहसास है अनजानी सी राह है जाने क्या चाहता है यह बावरा मन इसकी लीला यही जाने ना कहुँ तुझे चाँद का टुकड़ा ना कहुँ तुझे मेरे लिये बनाया है बस इतना कहुँ कि तू जीने का सहारा है जाने क्या रिश्ता है तुमसे जाने क्या नाता है अनजानी सी राहों पर चलना अनकही बातें महसूस करना हर आहट में तुझे महसूस करना शायद तुम्हे याद करने के तरीके बन गये है तेरी आँखों की नमकीन मस्तियाँ क्यों घायल करे मुझे इन एहसासों को कैसे बाँधू मैं मैं खो जाऊँ तुम्हारी इन नशीली आँखों में मैं फिर कहा जोर इस ज़माने को जाने क्या रिश्ता है क्या नाता है तुमसे

क्या अब तुम्हे मेरी बहुत याद आती होगी???????????

" hello Pagel !   कैसे हो ?" अरे मैं भी ना , अच्छे ही होगे तुम। हाँ हाँ जानती हूँ , टाइम नहीं है तुम्हारे पास , बहुत काम जो होता है ऑफिस का तुम्हें और मैं चाहती भी नहीं कि तुम्हारे काम में कोई वांधा या फिर मेरे वजह से तेरे काम में कोई रुकावट ना आऐ इसीलिए तेरे लिए कुछ words लिख रही हूँ। समय लेगे तो पढ़ लेना................... अच्छा सुनो ! मैं तुम से कुछ पूछना चाहती हूँ , कुछ कहना चाहती हूँ ! एक बार पढ़कर भूल जाना। क्योंकि ये बात अब अंदर रख नहीं पाऊँगी और तुम से कहने की हिम्मत भी नहीं है , और ना किसी से share कर सकती हूँ Pagel   किसी को चाहने के लिए क्या-2 जरुरी है ?.... या फिर क्या किसी को चाहने के लिए दोस्ती में प्यार हो जाता है ? शायद हाँ। तो बस यही समझ लो मुझे भी हो गया था। अब देखो हंसना मत , और ज़्यादा उड़ना भी नहीं। पर हाँ , प्यार ही कहते हैं इसे जो मुझे हुआ है। मुझे तुमसे बहुत प्यार हुआ है हद से भी ज्यादा , और प्यार तुम से होता भी क्यों नहीं ,   क्योंकि तेरी बातें भी तो जादू की तरह असर करती थीं | मैं तो टूटे दिल के साथ घूमती थी बे फिक्...